जब पास हमारे तुम होती हो
कितना अच्छा होता है जबपास हमारे तुम होती होत्राण सदृश, अस्तित्व तुम्हारा, मुझको ढँक लेता हैदुःख, चिंता के हर प्रवेग को बाधित कर देता हैप्राणों को कर प्रणय सिन्धु, सुख की तरिणी खेता है मेरे हिय की हर पीड़ा कापल में क्षय तुम कर देती होकितना अच्छा होता है...
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प्रताप नारायण सिंह
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[23 Sep 2009 02:24 AM]



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