swantrata diwas =pradeep manoria
गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रेसभी मनाते पर्व देश का आज़ादी की वर्षगांठ है वक्त है बीता धीरे धीरे साल द्वय और साठ है बहे पवन परचम फहराता याद जिलाता जीत रे गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे जगह जगह झंडे...
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प्रदीप मानोरिया
freedom
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[14 Aug 2009 00:24 AM]



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