कत्ल करके लग रहे वो बेखबर से
कत्ल करके लग रहे वो बेखबर सेलो हमी अब चल दिए है इस शहर सेसीख कर आए कहाँ से ढंग नया तुमघर जलाते हो निगाहों के शरर सेआंधिया-दर-आंधिया, हरसू अँधेराबन गया माहोल कैसा इक ख़बर सेटुकड़े टुकड़े हो चली है जिन्दगानीहै परेशां आदमी अपने सफर सेलिख रहा है हर किसी का वो...
[पूरी पोस्ट]
Rahul kundra
5
0
0
0
0
[29 Jul 2009 00:45 AM]



Shuffle








