मौन

duniyakalamkinazarse बैठ ले कुछ देर,आओ, एक पथ के पथिक सेप्रिय, अंत और अनंत के,तम-गहन-जीवन घेर। मौन मधु हो जाएभाषा मुकता की आड़ में,मन सरलता की बाड़ मेंजल-बिन्दु-सा बह जाए । सरल, अति स्वछंदजीवन, प्रात के लघु पात सेउत्थान-पतनाघात सेरह जाए चुप, निर्द्वंद्व । सूर्यकांत त्रिपाठी... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul kundra

सूर्यकांत त्रिपाठी " निराला "

views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[08 Sep 2009 05:16 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix