feminist poems
अबकी सावन मेंनहीं आयी हथेलियों सेमेहंदी की खुशबूनहीं बरसे बादलझूले नहीं पड़े पेड़ों परअबकी सावन मेंनहीं जा सकी घररोजी-रोटी के चक्कर में...
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mukti
मौसम
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[10 Aug 2009 14:57 PM]



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