सूखे फूलों को मत फेंको

feminist poems सूखे फूलों को मत फेंकोहो सकता है इनमें से हीबीज कोई धरती पर गिरकर मिट्टी-पानी से मिलजुलकरकिसलय एक नया बन जायेतरह-तरह के फूल खिलायेसूने उपवन को महकायेखत्म नहीं होती मिटकर भीबीजों की ताकत को देखोसूखे फूलों को मत फेंको... [पूरी पोस्ट]
writer mukti

धरती

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[17 Sep 2009 13:36 PM]

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