बादल के टुकड़े
मुट्ठी मेंआकाश पकड़ना चाहा थाकुछ बादल के टुकड़ेमेरे हाथ लगेहम अम्बर को देखतरसते रहते हैंये बादल दिन-रातबरसते रहते हैं...
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mukti
बादल
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[21 Sep 2009 13:48 PM]



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