सुबह शाम की किताब

उपस्थित एकआबादी यहाँ कई सालों से थी। पीछे की पहाडियां ही इससे ज्यादा पुरानी थी बाकी कुँआ, पेड़, मन्दिर सब धीरे धीरे बनते रहे। आदमी के पैर यहाँ सबसे पहले पड़े फ़िर कुआँ खुदा,घर बने पेड़ उगे और मन्दिर बना। भगवान् तो हमेशा उनके बीच रहा होगा पर उसकी ज़रूरत सबसे बाद में... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[26 Jul 2009 06:15 AM]

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