पार्क

उपस्थित पार्क जितना हरा हो सकता था, था। जितना सुंदर हो सकता था, था। एक रंगीन फव्वारा बिल्कुल बीचोबीच। तरह तरह के फूल, मुस्कुराते।झूले,स्लाइड्स,बेंचें, बच्चे,बूढे,युवा,और माली।सब कुछ भरा भरा सा। पार्क शहर की गहमा गहमी के केन्द्र में टापू की तरह था।बाहर निकलते ही... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[10 Aug 2009 04:31 AM]

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