घर गृहस्थी में धंसता एक पुराना प्रेम पत्र
" श्री गोपीवल्लभ विजयते" बम्बोई (तिथि अस्पष्ट) प्यारी सुगना,मधुर याद.श्री कृष्ण कृपा से मैं यहाँ ठीक हूँ और तुम भी घर पर प्रभु कृपा से सानंद होंगी.मेरा मन तो बहुत कर रहा है कि पत्र के स्थान पर स्वयं उपस्थित हो जाऊं पर एक सेठ का मुनीम होना कितना...
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sanjay vyas
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[23 Aug 2009 13:20 PM]



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