करवटों में कटी
प्यार की इक उमर करवटों में कटी;चाहतों में कटी आहटों में कटी।हो प्रतीक्षा की या हो विरह की घड़ी,खिड़कियों में कटी चौखटों में कटी। जिनके प्रियतम बसे दूर परदेश में, उनकी विरहन उमर घूंघटों में कटी। प्यार के तेल बिन जो जले ही नहीं,उन दियों की उमर दीवटों में...
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chandrabhan bhardwaj
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[03 Aug 2009 07:42 AM]



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