देखा नहीं
प्यार ने आग पानी को देखा नहीं;होम होती जवानी को देखा नहीं।ताज ठुकरा दिया बोझ सिर का समझ,प्यार ने हुक्मरानी को देखा नहीं। प्यार की राह में मोड़ ही मोड़ हैं, मोड़ लेती कहानी को देखा नहीं। गिर गई गांठ से कब कहाँ क्या पता, प्यार की उस निशानी को देखा नही।...
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chandrabhan bhardwaj
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[17 Aug 2009 02:25 AM]



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