सपने दिखा प्यार के

bhardwaj'sblog चल दिया कोई सपने दिखा प्यार के;सूझता है न अब कुछ सिवा प्यार के। आह आंसू तड़प हिचकियाँ सिसकियाँ, दर्द बदले में केवल मिला प्यार के। क्यों न जाने ज़माने की बदली नज़र, जबसे खुद को हवाले किया प्यार के। मोतियों की लड़ॊं से सजी हो भले, अर्थ क्या ज़िन्दगी का बिना... [पूरी पोस्ट]
writer chandrabhan bhardwaj
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[02 Sep 2009 05:29 AM]

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