नदी प्यार की
तन के आँगन में वर्षा हुई प्यार की;मन में बहने लगी इक नदी प्यार की।चार पल ही बिताये कभी साथ में,लगता जी ली हो पूरी सदी प्यार की।स्वाद अब और कोई सुहाता नहीं,जब से प्राणों ने बूटी चखी प्यार की। घुल गई है हवाओं में चारों तरफ़,ऐसी साँसों में खुशबू भरी प्यार...
[पूरी पोस्ट]
chandrabhan bhardwaj
6
0
0
0
0
[15 Sep 2009 06:12 AM]



Shuffle








