"...वक्त्त"
मिल ही जाता है वक्त्त मुझे देर सवेर ,लाख उससे मैं दामन बचाता रहूं !घोँप कर घड़ी के काँटे मेरी हथेली पर ;चाहता है कमबखत मुस्कुराता रहूं !!...
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सागर
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[13 Sep 2009 10:44 AM]



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