ऐसा होता है क्यूं

राजेश गुप्ता आपसे रूबरू ऐसा होता है क्यूंज़माने की ठोकर के बाद, बहुत याद आती है माँ.ऐसा होता है क्यूंजिस पे हो खुद से ज्यादा भरोसा, वही देता है धोखा.ऐसा होता है क्यूंमंदिर की सीडियां चढ़ते चढ़ते टूट जाती है आस्था.ऐसा होता है क्यूंलगता है बच्चों के सिवा, नही कोई जीने की वज़ह.ऐसा... [पूरी पोस्ट]
writer WindEnergyMan

hindi poetry

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[10 Sep 2009 22:15 PM]

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