पद न जाये -

अंगारे - विनोद विप्लवपुराने समय में जब प्राणों का उतना महत्व नहीं था और जब पद नाम की अमूल्य धरोहर का अविर्भाव नहीं हुआ था, तब लोग अपने वचन की रक्षा के लिये फटाफट प्राण त्याग दिया करते थे। रामायण, महाभारत और अन्य प्राचीन ग्रंथों में ऐसे उदाहरणों की भरमार है। उस... [पूरी पोस्ट]
writer विप्लव

vyangya

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[20 Sep 2009 05:01 AM]

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