वज़ह नहीं मालूम
कल्लन पूछे मियां लिख नहीं रहे हो आअज कल...में बोला लिख लिख के हाथ की उँगलियाँ टेढी हो रही हैं और आप कह रहे हो की लिख नहीं रहे..साबुन, तेल, जच्चा बच्चा, टीकाकरण ,ऐड्स लिखता ही जा रहा हूँ। अख़बार क्या टीवी क्या रेडियो क्या...फ़िर इधर कुछ राजनीतिक कार्य भी...
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rajkumar jha
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[24 Sep 2009 00:04 AM]



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