हथेलियों की हिना में मेरा नाम
झाँक आती है लेखनीउसके दिल मेंजो मेरा लगता नहीं कुछफ़िर भी बड़ा करीब हैपढ़ आती है उसका दिलये उसी राह का मुसाफिरलगता रकीब हैतेरी हथेलियों की हिना में मेरा नाम है कि नहींतेरी सोचों में मेरी जगह है कि नहींहर दिन के साथ मद्धिम होता है रँगे-हिनामगर वो रूहे-हिना...
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शारदा अरोरा
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[29 Jul 2009 09:30 AM]



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