सबको मालूम थे
सबको मालूम थे हमसे भी भुलाए न गएवे कथानक जो कभी तुमको सुनाये न गए गीत लिखते रहे जीवन में अंधेरों के खिलाफ़और दो-चार दिये तुमसे जलाए न गए दूर से ही सुनीं वेदों की ऋचाएं अक्सरयज्ञ में तो कभी शम्बूक बुलाए न गए यूकेलिप्टस के दरख्तों में न छाया न...
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Dr. Amar Jyoti
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[12 Aug 2009 22:45 PM]



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