है बिलाशक ये दरिया चमन के लिए .....( ग़ज़ल )
ग़ज़ल -----------है बिलाशक ये दरिया ,चमन के लिए ! चन्द बूँदें तो रखलो तपन के लिए !! बदमिज़ाजी न बादल की सह पाऊंगा ! मुझको मंज़ूर है प्यास मन के लिए !! वो तगाफुल नहीं मुझसे कर पाएंगे ! चाहिए आहुती भी हवन के लिए !! याद रखता है इतिहास केवल उन्हैं ! जो कफन ओढ़...
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ललितमोहन त्रिवेदी
ग़ज़ल
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[13 Sep 2009 00:30 AM]



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