मैंने दीवारों से पूछा
मैंने दीवारों से पूछाकविता वाचक्नवी चिह्नों भरी दीवारों से पूछा मैंनेंकिसने तुम्हें छुआ कब – कबबतलाओ तोवे बदरंग, छिली – खुरचीं- सीकेवल इतना कह पाईं -हम तोपूरी पत्थर- भर हैंजड़ सेजन सेछिजी हुईंकौन, कहाँ, कब, कैसेदे जाता हैअपने दाग हमेंत्यौहारों पर...
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कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
my poetry
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[19 Aug 2009 16:03 PM]



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