जाने कैसी स्त्री थी वह
एकालापजाने कैसी स्त्री थी वह जाने कैसी स्त्री थी वह ,कितनी धीर ,कितनी सबल !कैसे कहा होगा उसनेमाता पिता से,पीहर और ससुराल से -- नहीं ,मुझे यह विवाह स्वीकार नहीं- न, मैं नहीं मानती बालपने की शादी को- गुड़िया के खेल तक की समझ न थी मुझेविवाह की समझ कैसे होती-...
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कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
writers/activist
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[20 Aug 2009 10:54 AM]



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