नव वर्ष पर-विशेष

आज के ग़ज़लकार और ग़ज़ल. ले उड़े इस जहाँ से धुआँ और घुटन इक हवा ज़ाफ़रानी नये साल में द्विज जी के इस शे’र के साथ इस साल की अंतिम पोस्ट आपकी नज़्र है। वसीम बरेलवी की एक ग़ज़ल आज पहली बार "आज की ग़ज़ल" पर छाया कर रहा हूँ, ग़ज़ल से पहले दो शे’र वसीम बरेलवी के- न पाने से किसी के है, न... [पूरी पोस्ट]
writer सतपाल

नव वर्ष

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[31 Dec 2009 15:11 PM]

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