पीड़ा में सहभागी
घर में बहुत गरीबी थी। इतनी गरीबी कि सुबह खाना खाते समय शाम के खाने का पता नहीं होता था। घर में हम पांॅच भाई बहन खाने वाले थे और कमाने वाली मात्रा हमारी मां थी। सच। कभी कभी दुखी होकर मैं सोचता था कि घर छोड़कर कहीं दूर चला जाऊंॅ । पर फिर विचार आता था कि...
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Hem Chandra Joshi
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[10 Sep 2009 08:23 AM]



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