पिंगपिंग की अनोखी सहेली
हुआ यह कि एक दिन जया की शैतानियों पर मुझे प्यार आ गया, " देखो तो छटँकी कैसी हरकतें कर रही है ? " निखिल को मौज़ आ गयी, " छटँकी क्यों कहा, अँकल ?" मैं उनको इस विषय पर शह नहीं देना चाहता था, सो टाल गया, " देखो फ़िफ़्थ में पहुँच...
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डा. अमर कुमार
तुम्हें मालूम है..
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[06 Sep 2009 16:03 PM]



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