मंजिल दूर तो है तेरी लेकिन...
निदा फाजली साहिब की लिखी ग़ज़ल " सफ़र में धूप तो होगी" से प्रभाभित हों कर ग़ज़ल के कुछ शेयर लिखने की जुर्रत कर रहा हूँ. उन जैसी सोचने की मेरी कुव्वत या ख़यालात की गहराई तो नहीं है पर जो भी लिखा है आप की नज़र है. आप सभी ब्लागर को नव वर्ष की हार्दिक शुभ...
[पूरी पोस्ट]
आशु
20
1
0
1
0
[31 Dec 2009 14:36 PM]



Shuffle








