तू नहीं तुम.....;तुम नहीं आप

मातील्दा  प्रेम को भाषा की ज़रूरत थी ही नहीं....ऐसा इतिहास में दर्ज था...अब भाषा ज़रूरी हो गई थी । बहुत मेहनत से पुरुष नई भाषा ईजाद कर रहा था। उसके निपट प्रेमी से भाषा विज्ञानी हो जाने का भेद दोनों पर ही अब खुला था। हर दिन वह नया शब्‍द गढ़ता,  उसका अर्थ... [पूरी पोस्ट]
writer शायदा

हवाघर

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[27 Aug 2009 17:44 PM]

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