मेरे जिस्म में सरहदें हैं... (कॉन्ट्राडिक्शन-2)

सरपंच दो आंखें हैं... एक जोड़ी होंठ... दो बाहें... कुल मिलाकर एक पूरा जिस्म है... कुछ और हिस्से हैं उस जिस्म के... कुछ उभरे हुए तो कुछ गहरे... जिस्म गीला है... मैं शायराना हूं... मैं रूहानी हूं... मैं जिस्मानी हूं... एक जोड़ी बाहें एक और जोड़ी चाहती हैं...एक... [पूरी पोस्ट]
writer देवेश वशिष्ठ ' खबरी '

देवेश वशिष्ठ 'खबरी'

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[08 Nov 2009 08:03 AM]

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