7 महीने 16 दिन बाद…

मैनें आहुति बनकर देखा.. 27 जनवरी-12 सितम्बर.. 7 महीने से उपर हो चुके कुछ लिखे; और आज न लिखने का व्रत तोड़ बैठा। ऐसा नहीं है कि कुल जमा 17 पोस्टों में अपनी समस्त सोच उड़ेलकर खाली हो गया था इसलिये किनारा कर लिया। ऐसा भी नहीं है कि आज्ञाकारी बालक की तरह ‘काकचेष्टा बकोध्यानम’ में... [पूरी पोस्ट]
writer कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)
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[12 Sep 2009 09:22 AM]

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