हमारे समय में
(यह कविता कोई सात साल पहले लिखी गयी थी और उस समय अक्षर पर्व में प्रकाशित भी हुई थी। पता नहीं क्यूआज इसे पोस्ट करने का जी हुआ)हमारे समय मेंशेरखतरनाक से दयनीय में तब्दील हो चुका हैऔर मनुष्यों की सारी चिंताजानवरों के इर्द गिर्द सिमट गयी है। हमारे समय में...
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अशोक कुमार पाण्डेय
सात साल पुरानी कविता
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[24 Jul 2009 11:26 AM]



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