तैयारी एक लम्बी यात्रा की !
हर यात्रा में शामिल है लौटना अपने-अपने तरीके से लौटता है कोई रोज़ द़फ़्तर से पीठ पर लादे अपमानो की गठरी और पोस्टडेटेड चेक़ों में क़तरा-क़तरा बिकी सुरक्षा ओढ़कर सो जाता हैं स्वप्नहीन नींद में । कोई लौटता है प्यार की भरपूर तलाश के बाद गले में बांधे शर्तों का...
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अशोक कुमार पाण्डेय
लौटना
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[11 Sep 2009 11:17 AM]



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