उधार माँगने वाले लोग

असुविधा छोटी हो चादरतो पांव न होना ही बेहतरझुका ही रहता है हमेशामांगने वाले का सररहिमन वे नर मर चुके …सब याद थाउन पसरी हुई हथेलियों कोसुन रखे थे उन्होंने भीअपमान और बरबादियों के तमाम किस्सेसंतोष एक पवित्र शब्द था उनके भी शब्दकोष कालालच से नफ़रत करना ही सीखा... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक कुमार पाण्डेय

उधार

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[17 Sep 2009 02:18 AM]

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