ग़ज़ल

जीवन सन्दर्भ ग़ज़लदर्द के ,प्यास के पर क़तर जायेंगे ,मुद्दतों बाद हम अपने घर जायेंगे ,रौशनी बंद गलियों में फिरती रही ,यह अंधेरे दियों को निगल जायेंगे ,किसने किसको छला कौन कह पायेगा ,जब हमी में विभीषण निकल आएंगे ,इस जगह की प्रदूषित है आबोहवा ,मन की वैतरणी कैसे उतर... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[29 Jul 2009 04:39 AM]

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