तुमने मुझे पुकारा तो नहीं जांना ...

कविताओं के मन से तुमने मुझे पुकारा तो नहीं जांना ...एक सपने में कोई आधी -अधूरी आस जगीकहीं किसी खेत में सरसों की उवास चलीमेरे साँसों में तेरी सांस कैसे मिली ....तुमने मुझे पुकारा तो नहीं जांना .....ज़िन्दगी की राह बदल गयी....आसमान से एक बादल का टुकडा टुटातेरे नाम से उसने... [पूरी पोस्ट]
writer Vijay Kumar Sappatti
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[22 Jul 2009 01:34 AM]

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