सपना
आदरणीय समीर लाल जी . This poem is dedicated to you. इस नज़्म का backdrop जबलपुर शहर है ,जहाँ मैं कुछ महीनो पहले गया था. वहां Bhedaghat में बहती नर्मदा नदी और marble rocks ने मुझे ये नज़्म लिखने की प्रेरणा दी. मैं ये नज़्म सारे जबलपुर वासियों और वहां के कवि...
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Vijay Kumar Sappatti
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[03 Aug 2009 01:24 AM]



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