मृत्यु
ये कैसी अनजानी सी आहट आई है ;मेरे आसपास .....ये कौन नितांत अजनबी आया है मेरे द्वारे ...मुझसे मिलने, मेरे जीवन की , इस सूनी संध्या में ;ये कौन आया है ….अरे ..तुम हो मित्र ;मैं तो तुम्हे भूल ही गया था,जीवन की आपाधापी में !!!आओ प्रिय ,आओ !!!मेरे ह्रदय के...
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Vijay Kumar Sappatti
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[18 Sep 2009 06:02 AM]



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