मुर्दा पीटना बन्द कर कुछ अच्छा सोचें नये साल में…
कलम उठाकर लिखते थे हम शुभकामनाएं नये साल की लिफाफे को सजाकर कुछ फूलों की डिजायन से भरते थे उसमें अपना सुलेख ग्रीटिंग कार्ड तैयार कर लेते थे- सस्ता, सुन्दर और टिकाऊ अपने गुरुजनों को, सखा और सखियों को, बस थमा देते थे अपनी शुभकामनाएं। स्कूल में...
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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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[31 Dec 2009 13:44 PM]



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