कविवर
मैं पहली पंक्ति लिखता हूं और डर जाता हूं राजा के सिपाहियों से पंक्ति को काट देता हूं मैं दूसरी पंक्ति लिखता हूं और डर जाता हूं गुरिल्ला बागियों से पंक्ति को काट देता हूं मैंने अपनी जान की खातिर अपनी हजारों पंक्तियों की इस तरह हत्या की है उन पंक्तियों...
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anup
सुरजीत पातर की एक कविता
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[08 Sep 2009 08:02 AM]



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