चाँदनी हूँ
चाँद से मिलकर मैं निखर जाऊंगीचाँदनी हूँ छत पर उतर जाऊंगी ......सोचा न था लफ्जों में उतर सकती हूँएक दिन तेरी ग़ज़लों में भर जाऊंगी.....(साभार-- मासूम शायर)खाते हो झूठी क़समें भला क्योंक्या करोगे कभी जो गुज़र जाऊंगी......दूर तुमसे रहूँ भी तो कैसे सनम?अब...
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Jyotsna Pandey
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[27 Jul 2009 08:11 AM]



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