भिखारी कौन?
वैशेषिक दर्शन के सूत्रधार ऋषि कणाद जंगल में एक छोटी सी कुटिया बनाकर रहा करते थे। वह या तो कंद-मूल खाते या फिर अन्न के कण चुनकर लाते और उससे ही अपनी क्षुधा शांत करते। अन्नकणों से जीवन निर्वाह करने के कारण ही उनका नाम कणाद पडा। एक बार की बात...
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पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
धन
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[18 Aug 2009 10:42 AM]



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