सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया...........
आज वर्तमान के इस माहौल का अवलोकन करें तो पाएंगें कि चाहे घर-परिवार हो, चाहे समाज या फिर ये चिट्ठाजगत, हम लोग अपना कितना बहुमूल्य समय और ऊर्जा व्यर्थ के आपसी विवादों, मतभेदों तथा झगड़ों में यूँ ही व्यर्थ में गवाँते चले जा रहे हैं। आखिर ये झगड़े क्यों? एक...
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पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
अभिनन्दन्
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[31 Dec 2009 13:24 PM]



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