दिल के सब ज़ज़्बात लिख.

डॉ. चन्द्रकुमार जैन तू भी मेरी ही तरह कुछ अपने दिल की बात लिख दिन अगर है दिन ही लिख गर रात है तो रात लिखमैं समझता हूँ मोहब्बत का हर एक ग़म और फरेबमुझको अपनी दास्तां लिख दिल के सब ज़ज़्बात लिखक़ैद हैं तेरे भी दिल में सैकड़ों ग़ज़लें कहींआ कलम क़ागज़ उठा लिखने की कर शुरूआत लिखएक... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Chandra Kumar Jain
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[27 Sep 2009 00:04 AM]

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