यह कदंब का पेड़- सुभद्रा कुमारी चौहान

Chhutpan ki Kavitayen मेरे अनुरोध पर संपादक (सृजनगाथा) जयप्रकाश मानस ने अपने बचपन के पिटारे से यह कविता भेजी हैं। उनके ही शब्दों में - "भूला नहीं अब तक । शायद तीसरी या चौंथी में पढ़ा था । कदंब का पेड़ तो था नहीं हमारे घर के आसपास । पर गीत का प्रभाव इतना था कि जब भी दोस्तों के... [पूरी पोस्ट]
writer Vibha Rani

जयप्रकाश मानस

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[26 Sep 2009 02:44 AM]

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