दुष्यंत कुमार पर डाक टिकट कुमार जारी होगा

डोंगरे की डायरी हो गई पीर परबत- सी पिघलनी चाहिएइस हिमालय से कोई गंगा निकालनी चाहिएआज ये दीवार परदों की तरह हिलने लगीशर्त लेकिन थी की बुनियाद हिलनी चाहिएहर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव मेंहाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिएसिर्फ हंगामा खडा करना मेरा मकसद नहींमेरी... [पूरी पोस्ट]
writer DONGRE तृष्णा

दुष्यंत कुमार

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[23 Sep 2009 16:31 PM]

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