तुम चले क्यूँ नही जाते ? : यूँही चलते चलते

कोतुहल यूँ फूल भी ज़रा छुपकर मुस्कुराने लगे हैं,भँवरे भी इस बाग़ से बचकर जाने लगे हैं,तुम यहाँ से उठकर चले क्यूँ नही जाते?तुम्हे देखकर नज़ारे भी शर्माने लगे हैं।... [पूरी पोस्ट]
writer nadeem

चार लाइन

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[25 Sep 2009 12:44 PM]

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