कारगिल : तीन कवितायें, तीन किस्से

अ आ 1999 की बरसात के दिन थे। युद्ध के काले बादल बरसकर छंट चुके थे। मगर चुनावी युद्ध के बादल जनता की उम्मीदों पर बरस पडऩे को बेताब थे। चुनाव की रिपोर्टिंग के सिलसिले में उस दिन मैं खरगोन जिले में था। शाम को कहानीकार भालचंद्र जोशी के घर पर जुटान हुआ। संयोग से... [पूरी पोस्ट]
writer Arun Aditya

कविता

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[03 Aug 2009 21:29 PM]

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