कल तस्वीर में मैं रहूँ, न रहूँ ।

Grey Rainbow / स्याह इंद्रधनुष मेरी पीठ पीछे, शाम तुम ढली जाती हो, मैं जानता हूँ कि तुम चली जाती हो, फ़िसलते-लुढ़कते इस सूरज के साथ, सामने से घिरी आ रही है रात । मगर रात भी तो मेहमान है बस रात भर की ही, चली जाएगी, जैसे जीवन में आते-जाते हैं सुख-दु:ख, जन्म मृत्यु, यौवन-बुढ़ापा,... [पूरी पोस्ट]
writer Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष

kavita

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[31 Aug 2009 15:40 PM]

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