ग़ज़ल - यूं ही वक्त न जाया कर

kavideepakgupta यूं ही वक्त न जाया करख़ुद से भी बतियाया करउसपे इश्क का भूत चढाउसको मत समझाया करइज्ज़त , दौलत या रिश्तेकुछ तो यार कमाया करडर से ही मर जाएगाइतना मत घबराया करइक दिन मिटटी होना हैज्यादा मत इतराया करमन की अंधी गलियों मेंदीपक रोज़ जलाया करकवि दीपक... [पूरी पोस्ट]
writer kavideepakgupta
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[17 Sep 2009 12:47 PM]

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