बस थोड़ी देर और

मौन के खाली घर मे-                                       ओम आर्य हालाँकि रात के तलवों मेंचुभा पाला अभी नुकीला है,सुबह हर दफा मूंहखोलती है एक टुकड़ा धुंध के साथमाथे पर ठंड का गूमड़ लिएपीठ पर कोहरे की पोटली लादे,वक्त अभी डटा हुआ है औरकहता है सूरज लेकर ही आयेगा ......नए ऊर्जा का ,नये रंग का ,नये साल का .......वक्त के इस... [पूरी पोस्ट]
writer ओम आर्य

एहसास

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[31 Dec 2009 12:48 PM]

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