बस थोड़ी देर और
हालाँकि रात के तलवों मेंचुभा पाला अभी नुकीला है,सुबह हर दफा मूंहखोलती है एक टुकड़ा धुंध के साथमाथे पर ठंड का गूमड़ लिएपीठ पर कोहरे की पोटली लादे,वक्त अभी डटा हुआ है औरकहता है सूरज लेकर ही आयेगा ......नए ऊर्जा का ,नये रंग का ,नये साल का .......वक्त के इस...
[पूरी पोस्ट]
ओम आर्य
एहसास
15
0
0
0
13
[31 Dec 2009 12:48 PM]



Shuffle








